आइए जानते है, ब्रह्माण्ड के पांच रहस्यमय ग्रहो के बारे में | Mysterious Planets

Mistrious planet in our universe
Mysterious Planet in our universe

दोस्तों हमारा ब्रह्माण्ड बहुत विशाल है। न जाने कैसे -कैसे राज इनमे छिपे है। इंसानो के ज्ञान कि सीमा ब्रह्माण्ड में छिपे रहस्य को जानने से हमें रोक लेती है। क्यूँकि अभी तक इंसान अपने पुरे ब्राह्मण
को अच्छी तरह से पहचान नहीं पाया है। लेकिन मनुस्य की जिज्ञासा उसे सोचने पर मजबूर कर देती है। हमारा ब्रह्माण्ड कई अजीब चीजों से भरा है। जैसे की ब्लैक होल ,अल्कोहल का ग्रह ,हीरे से भरा
प्लेनेट आदि। आज हम इस blog में ऐसे ग्रहों के बारे में बताएँगे जिसे जान कर आप उसके बारे में और जानकारी हासिल करने की सोचोगे।

1 ) ऐसा प्लेनेट जहाँ केवल अंधकार हो

Coal Black Alien Planet

हां तो दोस्तों क्या आप किसी ऐसे प्लेनेट के बारे में सोच सकते हो जहाँ हर वक़्त केवल अँधेरा रहता हो। नहीं न ,लेकिन हमारे ब्रह्माण्ड में एक ऐसा भी प्लेनेट है जो solar system के किसी भी प्लेनेट
से बहुत ज्यादा काला और वहां औरो की अपेछा कुछ ज्यादा ही अंधकार है। मतलब एक ऐसी दुनिया जहाँ केवल अँधेरा ही अँधेरा हो। एकदम काला और भीषण गर्मी से तपता हुआ प्लेनेट। यह प्लेनेट इंसान की खोजी किसी भी काली वस्तु से भी ज्यादा काली है और वो है , Tres -2b

साल 2006 में वैज्ञानिकों ने इसकी खोज की। कहा जाता है की यह प्लेनेट अपने ऊपर पड़ने वाली रोशनी का केवल 1 % से भी कम रोशनी परिवर्तित(Refelct) करता है। इसका यही गुण इसे
मिल्की गैलेक्सी (Milky Galaxy) का सबसे डार्क प्लेनेट (Dark planet ) बनाता है। ट्रेस 2b लेड एक्रेलिक पेंट से भी कम रेफ्लेक्टिव है। ऐसी कौन सी वजह है जो इसे इतना dark बना देती है।
आइए जानते है इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य :

Tress 2b The Darkest Planet in Our Universe
  • 1 ) यह हमसे 750 light year या प्रकाश वर्ष दूर है।
  • 2 ) गैस से भरी एक काली गेंद जो अपने ऊपर पड़ने वाली सारी रोशनी अवशोषित कर लेती है।
  • 3 ) Tres-2 b हमारे jupiter जैसा गैस से भरा ग्रह है। दोनों ही प्लेनेट गैस gaint है।
  • 4 ) जुपिटर अपने ऊपर पड़ने वाली रोशनी का1 /3 भाग परावर्तित कर देती है लेकिन ट्रेस २ बी नहीं।
  • 5 ) इसकी सतह का तापमान 1000 डिग्री सेंटीग्रेट है।
  • 6 ) इसका atmosphere जुपिटर से अलग है।
  • 7 ) यह अमोनिया गैस के बादलो से नहीं बना है , बल्कि प्रकाश को सोखने वाली गैस से बना है। जैसे की vaporise sodium ,potasium ,गैसीय titenim oxside .

ये सभी केमिकल इसके डार्कनेस को पूरी तरह नई समझा पाते है। इसकी सही वजह क्या है वैज्ञानिको को बताने में अभी मुश्किल आ रही है। लेकिन कुछ वैज्ञानिको का कहना है कि यह पूरी तरह काला न होकर लाल रंग का जलता हुआ मैगनेट है। वैज्ञानिको ने इसकी अभी हल्की रोशनी ही देखी है जो की अपने होस्ट स्टार के चक्कर लगाने पर कभी-कभी दिखती है। अगर ये अपने स्टार का चक्कर न लगाता तो शायद ही ये कभी हमें दिखता। लेकिन वैज्ञानिक अभी इसके डार्कनेस के पीछे का सही कारण पता करने में जुटे हुए है।

2 ) क़ीमती हीरो से भरा प्लेनेट

Diamond Planet | Planet Of Diamond

दोस्तों कभी -कभी हम लोग ऐसी जगह की कल्पना कर लेते है जो बेसकीमती खजाने से भरा हो। अगर मैं आपसे ये कहूं कि हाँ है एक ऐसी जगह जहाँ केवल हीरे ही हीरे है तो क्या आप मुझ पर यकिन करेंगे ? शायद नहीं , लेकिन सच में ऐसी जगह है बस हमसे बहुत दूर। आइए बताते है एक ऐसे प्लेनेट के बारे में जिसका हीरे से बना हिस्सा , पृथ्वी के वजन से करीब तीन गुना ज्यादा है।
2004 में खोजे गए प्लेनेट 55 Cancri -e को लेकर वैज्ञानिको का कहना है कि यह हीरो से भरा हो सकता है। वैज्ञानिको की माने तो इसका ज्यादातर हिस्सा कार्बन का बना है। प्लेनेट के कोर में उपस्थित कार्बन बहुत ज्यादा दबाव के कारण हीरे में बदल गया होगा। आइये जाने इसके बारे में कुछ रोचक तथ्य :

  • 1 )यह पृथ्वी के आकार से दो गुना बड़ा है।
  • 2 ) इसका वजन पृथ्वी से 8. 5 गुना ज्यादा है।
  • 3 ) यह अपने Host Star का पूरा एक चक्कर लगाने में 18 घंटे से भी कम समय लेता है।
  • 4 ) इसका 1 /3 हिस्सा हीरे का बना हुआ है।
  • 5 ) यह हमसे 40 प्रकाशवर्ष दूर है। जिसका मतलब है उस तक पहुंच पाना नामुमकिन है।

दोस्तों इस प्लेनेट पर इतना हीरा है की अगर हम यहाँ पहुंच गए तो हमे कभी न ख़त्म होने वाली हीरे की खदान मिल जाएगी। लेकिन यह प्लेनेट हमसे इतना दूर है की हम यहाँ तक नई पहुंच सकते और अगर पहुंच भी गए तो इसकी सतह का तापमान (1700 डिग्री सेल्सियस ) हमे जला क रख कर देगी।

3 ) आग से जलता हुआ बर्फ का गोला

Gliese 436 b Neptune-sized red dwarf Gliese 436

दोस्तों कल्पना करो की आप ऐसे प्लेनेट पर हो जो की ठोस बर्फ का बना है। जहाँ न तो चट्टानें है और न ही जमीन ,अगर है भी तो सिर्फ चारो तरफ बर्फ ही बर्फ। लेकिन इसका Host Star इसकी सतह को 440 डिग्री सेल्सियस से गर्म कर रहा है ,फिर भी बर्फ पिघल नई रही है। क्या कारण हो सकता है इसके पीछे ?आइए जानते है :

  • 1 )यह प्लेनेट physics के नियमो को चुनौती देने वाला है। कहा जाता है की यह प्लेनेट आग में जलता हुआ बर्फ का गोला है। जो की लाखो सालो से ऐसे ही जल रहा है।
  • 2 ) उसकी खोज 2004 में हुई थी। यह neptune के बराबर है।
  • 3 )यह अपने सूर्य या Host Star का एक चक्कर लगाने में 2 दिन 15 घंटे का समय लगता है। अपने सूर्य के इतने पास होने के बावजूद भी यहाँ बर्फ ही बर्फ है।

4 ) ऐसा क्यों हो रहा है यह पता करना वैज्ञानिको के लिए एक बड़ा सवाल पैदा कर रहा है ,आइए इसके पीछे का रहस्य जानने की कोशिश करे :
मानते है की इसके पीछे एक शक्तिशाली Gravity का हाथ है। जिसकी वजह से इस प्लेनेट की सतह पर भीषण गर्मी से पिघल रही बर्फ से बन रही भाप इसके केंद्र द्वारा सोख ली जा रही है और सतह पर
लगातार बर्फ की परत बनी रह रही है।

4 ) जीवन की उम्मीद का प्लेनेट

Gliese 581c | The Second Planet

दोस्तों ये प्लेनेट एक ओर से जल रहा है तो वहीं दूसरी ओर से बर्फ से जमा हुवा सा प्रतीत होता है। इसके बावजूद वैज्ञानिक ये मानते है की इस ग्रह पर जीवन है या हो सकता है ?यानि प्लेनेट पर हमारी जैसी सभ्यता फल -फूल रही है। लेकिन ऐसा कैसे संभव है ? आइए जानते है :
हमसे २० प्रकाशवर्ष दूर ,वजन में पृथ्वी का 5.5 गुना एक प्लेनेट है जिसे Gliese 581c कहते है।

  • 1 ) यह प्लेनेट Tidally Locked है इसका मतलब यह है की यह प्लेनेट अपने धुरी पैर नहीं घूमता है।इसलिए जब ये अपने सूर्य का चक्कर लगता है तो जो हिस्सा सूर्य की ओर होता है वह सदैव दहकता रहता है। वहीं दूसरा हिस्सा जिस पर सूर्य की रोशनी नहीं पड़ती है वहाँ सदैव बर्फ रहती है। गर्म वाला हिस्सा किसी भी जीवित चीज को जला के राख कर देती है और बर्फ वाला हिस्सा इतना ठंडा है की जीवन की उम्मीद ही नई है। फिर भी वैज्ञानिक इस प्लेनेट पर जीवन होने की बात करते है। ऐसा कैसे संभव है। जानिए इसके पीछे का राज…
  • 2 ) दोस्तों इसके पीछे एक राज है। गर्म और ठंडे हिस्से के बीच वाला हिस्सा जीवन के लिए बिल्कुल अनुकुल है। यहाँ न ज्यादा गर्मी है और न ही ज्यादा ठंडी है।
  • 3 ) वैज्ञानिको का कहना है की इस जगह चरमपसीव जीव एस्क्यूमो5 जीव हो सकते है। एस्क्यूमो5 क्या है? ये एक ऐसे जीव है जो चरम वातावरण में जीवित रह सकते है जहाँ पृथ्वी पर रहने वाले जीव बहुत कठिनाई से जीवित रह सके। चरम वातावरण में शामिल है , ज्वालामुखी का खौलता पानी ,तेजाब से भरपूर वातावरण और ऐसी कई जहरीली पदार्थो से भरपूर वातावरण भी शामिल है।
  • 4 ) वैज्ञानिको के लिए एक बड़ा सवाल है इस प्लेनेट को लेकर। इन जीवो के अलावा क्या इंसानो की भाती भी कोई मौजूद है यहाँ पर ?

5 ) इस सवाल के जवाब मे इंसानो द्वारा 2008 में एक electronic signal Gliese 581c को भेजा गया है और अनुमान है की 2029 तक यह इलेक्ट्रॉनिक signal इस प्लेनेट तक पहुंच जाएगा। और बस देखना ये है की उधर से कोई reply आता है की नहीं।

5 ) मिल गयी नई पृथ्वी

Kepler-452b

अमेरिका स्पेस एजेंसी नासा ने पृथ्वी जैसे दूसरे ग्रह को खोजने का दवा किया है। इसे Kelper 452b नाम दिया गया है। यहाँ पृथ्वी की तरह ही चट्टानें है,यह भी अपने सूर्य से उतनी ही दुरी पर है जितनी की हमारी पृथ्वी हमारे सूर्य से,न ज्यादा ठंडा न ज्यादा गर्मी यानि इस पर पानी और जिंदगी होने की सम्भावना है। पृथ्वी की तरह वहां जीवन होने की सम्भावना के चलते इसे Earth 2. 0 भी नाम दिया जा रहा है। अनुमान लगाया जा रहा है की यहाँ एलिएंट हो सकते है यानि हमारी तरह की सभ्यता को मानने वाले लोग हो सकते है। यह प्लेनेट G 2 की परिक्रमा जीवन के दायरे में लगा रहा है। G 2 भी सूरा क समान ही एक तारा है। इस ग्रह के सतह पर पानी काफी मात्रा में मौजूद है ऐसा वैज्ञानिको का मानना है। अगर Kelper 452b पर पेड़ पौधे भेजे जाये तो वो जिन्दा रह सकते है। आइए जानते है कुछ विशेषता इस प्लेनेट के बारे में :

  • 1 ) यह अपने सूर्य का चक्कर 385 दिन में पूरा करता है। यानि पृथ्वी से 20 दिन ज्यादा लेता है G 2 की चक्कर लगाने में।
  • 2 ) इसकी परते भी पृथ्वी की तरह चट्टानी है।
  • 3 ) temperature भी पृथ्वी के सामान है।
  • 4 ) विज्ञानिको की माने तो गर यहाँ धरती है तो जीवन भी पक्का ही होगा।
  • 5 ) यह प्लेनेट पृथ्वी का 1.5 गुना बड़ा है।

6 ) यह भी अपने तारे से गर्मी और प्रकाश लेता है।
हम जानते है जो ग्रह अपने तारे से जितना करीब होगा उतना ही गर्म होगा और जो जितना दूर उतना ठंडा होगा। कैपलर452 b भी पृथ्वी की तरह ही अपने सूर्य से उचित दूरी पर है ,इसलिए यहाँ भी जीवन मौजूद हो सकता है।
यहाँ पानी और ज्वालामुखी दोनों पाए जा सकते है। इस प्लेनेट पर पेड़ -पौधे तथा अन्य जीव में सो सकते है। तो क्या वैज्ञानिक ये कह सकते है की दूसरी पृथ्वी मिल गयी ? इसका पता तो वैज्ञानिक तभी कर सकते है जब वो
वहां पहुंच जाये। लेकिन यहाँ आकर निराशा हाथ लगती है क्यूँकि Kepler 452 b हमसे 1400 प्रकाशवर्ष दूर है। यानि वहां पहुंचने में हमें अरबो साल लग जायेंगे। वहां के atmosphere के हिसाब से हम केवल अंदाजा लगा
सकते है की वहां जीवन है।

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